श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.4.26 
कुमुदश्चोन्नतश्चैव तृतीयश्च बलाहक:।
द्रोणो यत्र महौषध्य: स चतुर्थो महीधर:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
पर्वतों में प्रथम कुमुद, दूसरा उन्नत और तीसरा बलाहक है। चौथा द्रोणाचल है, जिसमें नाना प्रकार की औषधियाँ हैं।
 
Among the mountains, the first is Kumud, the second is Unnat and the third is Balahak. The fourth is Dronaachal, which has various kinds of medicinal herbs. 26.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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