श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 3: भारतादि नौ खण्डोंका विभाग  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.3.28 
जम्बूद्वीपं समावृत्य लक्षयोजनविस्तर:।
मैत्रेय वलयाकार: स्थित: क्षारोदधिर्बहि:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! यह जम्बूद्वीप चारों ओर से एक लाख योजन विस्तार वाले खारे पानी के वलयाकार समुद्र से घिरा हुआ है।
 
O Maitreya, this Jambudweep is surrounded on all sides by a ring-shaped ocean of salty water extending one lakh yojanas. 28.
 
इति श्रीविष्णुपुराणे द्वितीयेंऽशे तृतीयोऽध्याय:॥३॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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