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श्लोक 2.3.27  |
नववर्षं तु मैत्रेय जम्बूद्वीपमिदं मया।
लक्षयोजनविस्तारं सङ्क्षेपात्कथितं तव॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| हे मैत्रेय! इस प्रकार मैंने तुमसे नववर्ष के लिए विशेष तथा एक लाख योजन में विस्तृत इस जम्बूद्वीप का संक्षेप में वर्णन किया है॥ 27॥ |
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| O Maitreya! Thus I have briefly described to you this Jambudweep, which is special for the New Year and spread over a lakh yojanas.॥ 27॥ |
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