श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 3: भारतादि नौ खण्डोंका विभाग  »  श्लोक 15-17
 
 
श्लोक  2.3.15-17 
तास्विमे कुरुपाञ्चाला मध्यदेशादयो जना:।
पूर्वदेशादिकाश्चैव कामरूपनिवासिन:॥ १५॥
पुण्ड्रा: कलिङ्गा मगधा दक्षिणाद्याश्च सर्वश:।
तथापरान्ता: सौराष्ट्रा: शूराभीरास्तथार्बुदा:॥ १६॥
कारूषा मालवाश्चैव पारियात्रनिवासिन:।
सौवीरा: सैन्धवा हूणा: साल्वा: कोशलवासिन:।
माद्रारामास्तथाम्बष्ठा: पारसीकादयस्तथा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इन नदियों के तट पर कुरु, पांचाल और मध्यदेश के निवासी, पूर्वदेश और कामरूप के निवासी, पुण्ड्र, कलिंग, मगध और दक्षिणात्य के निवासी, अपरान्त के निवासी, सौराष्ट्र और शूर के निवासी, आभीर और अर्बुद, कारूष, मालव और पारियात्र के निवासी, सौवीर, सैंधव, हूण, शाल्व और कोसल के निवासी, मद्र, आराम, अम्बष्ठ और पारसी लोग रहते हैं। 15-17
 
On the banks of these rivers live the inhabitants of Kuru, Panchal and Madhyadesa, the inhabitants of Purvadesh and Kamrup, the people of Pundra, Kalinga, Magadha and Dakshinatya, the people of Aparanta, the people of Saurashtra and the Shurs, the Abhirs and Arbudas, the residents of Karusha, Malava and Pariatran, the Sauvirs, the Saindhavas, the Huns, the people of Salva and Kosal and the people of Madra, Aram, Ambastha and the Parsis. 15-17
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