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श्लोक 2.3.13-14  |
कृतमाला ताम्रपर्णीप्रमुखा मलयोद्भवा:।
त्रिसामा चार्यकुल्याद्या महेन्द्रप्रभवा: स्मृता:॥ १३॥
ऋषिकुल्याकुमाराद्या: शुक्तिमत्पादसम्भवा:।
आसां नद्युपनद्यश्च सन्त्यन्याश्च सहस्रश:॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| कृतमाला और ताम्रपर्णी आदि नदियाँ मलयाचल से, त्रिसामा और आर्यकुल्या आदि महेन्द्रगिरि से तथा ऋषिकुल्या और कुमारी आदि शुक्तिमान पर्वत से निकलती हैं। इनकी भी हजारों शाखाएँ और सहायक नदियाँ हैं ॥13-14॥ |
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| Kritamala and Tamraparni etc. rivers originate from Malayachal, Trisama and Aryakulya etc. originate from Mahendragiris and Rishikulya and Kumari etc. originate from Shuktiman mountain. They also have thousands of branch rivers and tributaries. 13-14॥ |
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