श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 3: भारतादि नौ खण्डोंका विभाग  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  2.3.10-11 
शतद्रूचन्द्रभागाद्या हिमवत्पादनिर्गता:।
वेदस्मृतिमुखाद्याश्च पारियात्रोद्भवा मुने॥ १०॥
नर्मदा सुरसाद्याश्च नद्यो विन्ध्याद्रिनिर्गता:।
तापीपयोष्णीनिर्विन्ध्याप्रमुखा ऋक्षसम्भवा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे मुने! इसकी शतद्रु, चंद्रभागा आदि नदियाँ हिमालय की तलहटी से, वेद और स्मृति आदि पारियात्र पर्वत से, नर्मदा और सुरसा आदि विन्ध्याचल से तथा तापी, पयोष्णी और निर्विन्ध्या आदि ऋक्षगिरियों से निकलती हैं। 10-11॥
 
Hey Mune! Its rivers like Shatdru and Chandrabhaga etc. originate from the Himalayan foothills, Veda and Smriti etc. originate from Pariatra mountain, Narmada and Sursa etc. originate from Vindhyachal and Tapi, Payoshni and Nirvindhya etc. originate from Rikshagiris. 10-11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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