एक: समस्तं यदिहास्ति किञ्चि-
त्तदच्युतो नास्ति परं ततोऽन्यत् ।
सोऽहं स च त्वं स च सर्वमेत-
दात्मस्वरूपं त्यज भेदमोहम्॥ २३॥
अनुवाद
इस जगत् में जो कुछ है, वह एक ही आत्मा है और वह अविनाशी है, उससे भिन्न कुछ भी नहीं है; मैं, तू और ये सब आत्मा ही हैं। इसलिए तू भेद-ज्ञान की आसक्ति छोड़ दे॥ 23॥
Whatever is there in this world is only one soul and it is immortal, there is nothing other than it; I, you and all these are only the soul. Therefore, leave the attachment of the knowledge of difference.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥