| श्री विष्णु पुराण » अंश 2: द्वितीय अंश » अध्याय 16: ऋभुकी आज्ञासे निदाघका अपने घरको लौटना » श्लोक 23 |
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| | | | श्लोक 2.16.23  | एक: समस्तं यदिहास्ति किञ्चि-
त्तदच्युतो नास्ति परं ततोऽन्यत् ।
सोऽहं स च त्वं स च सर्वमेत-
दात्मस्वरूपं त्यज भेदमोहम्॥ २३॥ | | | | | | अनुवाद | | इस जगत् में जो कुछ है, वह एक ही आत्मा है और वह अविनाशी है, उससे भिन्न कुछ भी नहीं है; मैं, तू और ये सब आत्मा ही हैं। इसलिए तू भेद-ज्ञान की आसक्ति छोड़ दे॥ 23॥ | | | | Whatever is there in this world is only one soul and it is immortal, there is nothing other than it; I, you and all these are only the soul. Therefore, leave the attachment of the knowledge of difference.॥ 23॥ | | ✨ ai-generated | | |
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