| श्री विष्णु पुराण » अंश 2: द्वितीय अंश » अध्याय 16: ऋभुकी आज्ञासे निदाघका अपने घरको लौटना » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 2.16.22  | सितनीलादिभेदेन यथैकं दृश्यते नभ:।
भ्रान्तिदृष्टिभिरात्मापि तथैक: सन्पृथक्पृथक्॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | जैसे एक ही आकाश श्वेत, नीला आदि भिन्न-भिन्न रंगों वाला दिखाई देता है, वैसे ही मिथ्या दृष्टि वाले मनुष्यों को एक ही आत्मा भिन्न-भिन्न दिखाई देती है ॥22॥ | | | | Just as the same sky appears as having different colours like white, blue etc., similarly the same Self appears as different to the people with wrong views. ॥22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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