एवमेकमिदं विद्धि न भेदि सकलं जगत्।
वासुदेवाभिधेयस्य स्वरूपं परमात्मन:॥ ३५॥
अनुवाद
इस परम तत्त्व का चिन्तन करते हुए इस सम्पूर्ण जगत् को एक ही वासुदेव परमात्मा का स्वरूप जान; इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है ॥35॥
Thinking about this supreme principle, know this entire world to be the form of one Vasudeva Paramatmahi; There is absolutely no discrimination in this. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥