श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.15.35 
एवमेकमिदं विद्धि न भेदि सकलं जगत्।
वासुदेवाभिधेयस्य स्वरूपं परमात्मन:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
इस परम तत्त्व का चिन्तन करते हुए इस सम्पूर्ण जगत् को एक ही वासुदेव परमात्मा का स्वरूप जान; इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है ॥35॥
 
Thinking about this supreme principle, know this entire world to be the form of one Vasudeva Paramatmahi; There is absolutely no discrimination in this. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)