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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश
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श्लोक 18
श्लोक
2.15.18
क्व निवासो भवान्विप्र क्व च गन्तुं समुद्यत:।
आगम्यते च भवता यतस्तच्च द्विजोच्यताम्॥ १८॥
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मुझे बताओ कि तुम कहाँ ठहरे हो? कहाँ जाना है? और कहाँ से आये हो?॥18॥
O great Brahmin, tell me where are you staying? Where are you planning to go? And where have you come from?॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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