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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 15: ऋभुका निदाघको अद्वैतज्ञानोपदेश
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श्लोक 10
श्लोक
2.15.10
प्रक्षालिताङ्घ्रिपाणिं च कृतासनपरिग्रहम्।
उवाच स द्विजश्रेष्ठो भुज्यतामिति सादरम्॥ १०॥
अनुवाद
उस द्विजश्रेष्ठ ने उसके हाथ-पैर धुलवाकर फिर उसे आसन पर बिठाया और आदरपूर्वक कहा - 'भोजन करो' ॥10॥
That Dwijshreshtha washed his hands and feet and then made him sit on the seat and respectfully said - 'Have food'. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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