तस्यात्मपरदेहेषु सतोऽप्येकमयं हि यत्।
विज्ञानं परमार्थोऽसौ द्वैतिनोऽतथ्यदर्शिन:॥ ३१॥
अनुवाद
'वह एक ही है, यद्यपि वह हमारे शरीर में तथा अन्य प्राणियों के शरीर में भी विद्यमान है' - इस प्रकार का विशेष ज्ञान ही परम सत्य है; द्वैतभाव वाले पुरुष ही परम सत्य के दर्शन करने वाले हैं ॥31॥
He is one, even though He exists in our body and in the body of other beings' - the special knowledge of this kind is the ultimate truth; the persons having dualistic feelings are the ones who have seen the ultimate truth. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥