परमात्मात्मनोर्योग: परमार्थ इतीष्यते।
मिथ्यैतदन्यद्द्रव्यं हि नैति तद्द्रव्यतां यत:॥ २७॥
अनुवाद
यदि परमात्मा और जीवात्मा का मिलन ही परम सत्य कहा जाए, तो ऐसा कहना सर्वथा मिथ्या है, क्योंकि एक पदार्थ का दूसरे पदार्थ के साथ एकत्व कभी नहीं हो सकता ॥27॥
If the union of the Supreme Soul and the soul is called the ultimate truth, then saying so is entirely false, because there can never be unity of one substance with another. *॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥