पुमान्न देवो न नरो न पशुर्न च पादप:।
शरीराकृतिभेदास्तु भूपैते कर्मयोनय:॥ ९८ ॥
अनुवाद
हे राजन! पुरुष न तो देवता है, न मनुष्य, न पशु, न वृक्ष। ये सब कर्मजन्य शरीरों के ही विभिन्न रूप हैं॥ 98॥
O King! The Purusha (living being) is neither a god, nor a human, nor an animal, nor a tree. All these are just variations of the forms of the bodies born of karma.॥ 98॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥