श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  2.13.95 
शिबिका दारुसङ्घातो रचनास्थितिसंस्थित:।
अन्विष्यतां नृपश्रेष्ठ तद्भेदे शिबिका त्वया॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! किसी विशेष संरचना में व्यवस्थित लकड़ी के टुकड़ों का समूह 'शिबिका' है। यदि वह उससे भिन्न कुछ हो, तो लकड़ी के टुकड़ों को अलग करके उसकी खोज करो॥ 95॥
 
O best of kings! The group of wooden pieces arranged in a particular structure is the 'Shibika'. If it is something different from that, then separate the wooden pieces and search for it.॥ 95॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)