श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  2.13.93 
वृक्षाद्दारु ततश्चेयं शिबिका त्वदधिष्ठिता।
किं वृक्षसंज्ञा वास्या: स्याद्दारुसंज्ञाथ वा नृप॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! वृक्ष से लकड़ी उत्पन्न हुई और उसी से आपका रथ बना; अतः आप बताइए कि इसे लकड़ी कहें या वृक्ष?॥ 93॥
 
O King! The tree produced wood and from that your chariot was made; so tell me should this be called wood or tree?॥ 93॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)