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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 13: भरत-चरित्र
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श्लोक 91
श्लोक
2.13.91
यदा समस्तदेहेषु पुमानेको व्यवस्थित:।
तदा हि को भवान्सोऽहमित्येतद्विफलं वच:॥ ९१॥
अनुवाद
परंतु जब एक ही आत्मा सब शरीरों में निवास करती है, तब 'तू कौन है? मैं वह हूँ' ऐसा कथन व्यर्थ है ॥91॥
But when the same Self resides in all the bodies, then the statements like 'Who are you? I am that' are futile. ॥91॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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