Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.13.85: हे ब्रह्मन्! ‘मैं वही हूँ जो है (अर्थात् आत्मा जो कर्ता-भोक्ता के रूप में प्रकट होता है और सदा सत्ता रूप में विद्यमान रहता है)’ – ऐसा क्यों नहीं कहा जा सकता? हे द्विज! यह ‘अहंकार’ शब्द आत्मा में किसी प्रकार का दोष उत्पन्न नहीं करता ॥85॥ | vishnu अध्याय 2.13: भरत-चरित्र । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
योऽस्ति सोऽहमिति ब्रह्मन्कथं वक्तुं न शक्यते।
आत्मन्येष न दोषाय शब्दोऽहमिति यो द्विज॥ ८५॥
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! ‘मैं वही हूँ जो है (अर्थात् आत्मा जो कर्ता-भोक्ता के रूप में प्रकट होता है और सदा सत्ता रूप में विद्यमान रहता है)’ – ऐसा क्यों नहीं कहा जा सकता? हे द्विज! यह ‘अहंकार’ शब्द आत्मा में किसी प्रकार का दोष उत्पन्न नहीं करता ॥85॥
Hey Brahman! ‘I am that which is [i.e. the soul which appears as the doer-consumer and is always present in the form of being]’ – why cannot it be said like this? Hey Dwija! This word ‘ego’ does not cause any kind of defect in the soul. 85॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥