vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 13: भरत-चरित्र
»
श्लोक 84
श्लोक
2.13.84
यस्त्वेतद्भवता प्रोक्तं सोऽहमित्येतदात्मन:।
वक्तुं न शक्यते श्रोतुं तन्ममेच्छा प्रवर्तते॥ ८४॥
अनुवाद
परन्तु मैं आपकी यह बात सुनना चाहता हूँ कि, "मैं कौन हूँ, यह नहीं बताया जा सकता।" ॥84॥
But I desire to hear what you said, "Who I am cannot be told." ॥ 84॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×