श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.13.84 
यस्त्वेतद्भवता प्रोक्तं सोऽहमित्येतदात्मन:।
वक्तुं न शक्यते श्रोतुं तन्ममेच्छा प्रवर्तते॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
परन्तु मैं आपकी यह बात सुनना चाहता हूँ कि, "मैं कौन हूँ, यह नहीं बताया जा सकता।" ॥84॥
 
But I desire to hear what you said, "Who I am cannot be told." ॥ 84॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)