श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.13.82 
सर्वस्यैव हि भूपाल जन्तो: सर्वत्र कारणम्।
धर्माधर्मौ यत: कस्मात्कारणं पृच्छॺते त्वया॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! समस्त प्राणियों की समस्त अवस्थाओं के कारण धर्म और अधर्म ही हैं, अतः आप मेरे आने का कारण क्यों पूछते हैं? ॥ 82॥
 
O King, the causes of all states of all beings are Dharma (righteousness) and Adharma (irreligion), so why do you specifically ask the reason for my arrival? ॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)