श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  2.13.80 
ब्राह्मण उवाच
श्रूयतां सोऽहमित्येतद्वक्तुं भूप न शक्यते।
उपभोगनिमित्तं च सर्वत्रागमनक्रिया॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण बोला, 'हे राजन! सुनिए, मैं अमुक हूँ - यह नहीं कहा जा सकता। और आपने मेरे यहाँ आने का जो कारण पूछा है, वह यह है कि आना-जाना आदि सब क्रियाएँ कर्मफल भोगने के लिए ही होती हैं।
 
The Brahmin said, 'O King! Listen, I am so-and-so - this cannot be said. And the reason for my coming here that you have asked, all activities like coming and going etc. are done only for the enjoyment of the fruits of karma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)