श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.13.8 
अहिंसादिष्वशेषेषु गुणेषु गुणिनां वर:।
अवाप परमां काष्ठां मनसश्चापि संयमे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ भरत ने अहिंसा आदि समस्त गुणों में तथा संयम में परम श्रेष्ठता प्राप्त की ॥8॥
 
Bharata, the best among the virtuous, attained the highest excellence in all virtues like non-violence and in self-control. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)