श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  2.13.78 
राजोवाच
भो भो विसृज्य शिबिकां प्रसादं कुरु मे द्विज।
कथ्यतां को भवानत्र जाल्मरूपधर: स्थित:॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा- हे ब्राह्मणराज! इस रथ को त्यागकर मुझ पर दया कीजिए। हे प्रभु! कृपया मुझे बताइए कि आप यह जड़ वेश धारण करने वाले कौन हैं?॥ 78॥
 
The king said— O Brahmin king! Please leave this chariot and show mercy on me. Lord! Please tell me, who are you wearing this inanimate attire?॥ 78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)