vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 13: भरत-चरित्र
»
श्लोक 75
श्लोक
2.13.75
यदा पुंस: पृथग्भाव: प्राकृतै: कारणैर्नृप।
सोढव्यस्तु तदायास: कथं वा नृपते मया॥ ७५॥
अनुवाद
हे राजन! जब मनुष्य स्वाभाविक कारणों से सर्वथा भिन्न है, तब मैं उसके परिश्रम को कैसे सहन कर सकता हूँ?॥ 75॥
O King! When the person is completely different from the natural causes then how can I bear his hard work?॥ 75॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×