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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 13: भरत-चरित्र
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श्लोक 72
श्लोक
2.13.72
यदा नोपचयस्तस्य न चैवापचयो नृप।
तदा पीवानसीतीत्थं कया युक्त्या त्वयेरितम्॥ ७२॥
अनुवाद
हे राजन! जब न तो उपापचय (वृद्धि) है और न उपापचय (क्षय) है, तब आपने किस तर्क से कहा कि 'आप मोटे हैं'?॥ 72॥
O King, when there is no metabolism (growth) or metabolism (decay), then by what logic did you say that 'you are fat'?॥ 72॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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