श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.13.7 
श्रीपराशर उवाच
शालग्रामे महाभागो भगवन्न्यस्तमानस:।
स उवास चिरं कालं मैत्रेय पृथिवीपति:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - हे मैत्रेय! पृथ्वी के उस महान् भाग भगवान भरतजी ने भगवान् में मन लगाकर बहुत समय तक शालग्राम क्षेत्र में निवास किया॥7॥
 
Shri Parasharji said – O Maitreya! That great part of the earth, Lord Bharatji, remained in Shalagram area for a long time with his mind focused on God. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)