अहं त्वं च तथान्ये च भूतैरुह्याम पार्थिव।
गुणप्रवाहपतितो भूतवर्गोऽपि यात्ययम्॥ ६९॥
अनुवाद
हे राजन! मैं, आप तथा अन्य सभी जीव पंचभूतों से ही पोषित हैं और यह प्राणी वर्ग भी गुणों के प्रवाह में बह रहा है ॥69॥
O King! I, you and all other living beings are sustained by the five elements. And this category of beings is also flowing in the flow of qualities. ॥ 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥