vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 13: भरत-चरित्र
»
श्लोक 67
श्लोक
2.13.67
वक्ष:स्थलं तथा बाहू स्कन्धौ चोदरसंस्थितौ।
स्कन्धाश्रितेयं शिबिका मम भारोऽत्र किंकृत:॥ ६७॥
अनुवाद
पेट के ऊपर वक्ष, भुजाएँ और कंधे हैं, और कंधों पर यह टोकरी रखी है। मैं इसमें बोझ कैसे ढोऊँ?॥67॥
Above the abdomen are the chest, arms and shoulders, and on the shoulders is placed this basket. How could I carry the burden in it?॥ 67॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×