श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.13.65 
त्वयोढा शिबिका चेति त्वय्यद्यापि च संस्थिता।
मिथ्यैतदत्र तु भवाञ्छृणोतु वचनं मम॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
"तुमने मेरी शिबिका को उठाया है; वह अब भी तुम्हारे कंधों पर है" - ऐसा कहना तुम्हारा सर्वथा मिथ्या है। अतः मेरी बात सुनो -॥65॥
 
"You have carried my Shibikaaka; even now it is on your shoulders" - it is completely false of yours to say so. So listen to me -॥ 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)