श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.13.59 
पुनस्तथैव शिबिकां विलोक्य विषमां हि स:।
नृप: किमेतदित्याह भवद्भिर्गम्यतेऽन्यथा॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
परंतु फिर भी उसकी चाल असमान देखकर राजा ने पुनः कहा - "अरे, यह क्या है? तुम ऐसे असमान ढंग से क्यों चल रहे हो?"॥59॥
 
But even then seeing his movements uneven, the king again said - "Oh, what is it? Why are you walking in such an uneven manner?"॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)