श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.13.58 
विलोक्य नृपति: सोऽथ विषमां शिबिकागतिम्।
किमेतदित्याह समं गम्यतां शिबिकावहा:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार शिबिका की विचित्र चाल देखकर राजा ने कहा - "हे शिबिकावाहको! यह क्या करते हो? उसी गति से चलो ॥58॥
 
Thus, seeing Shibika's odd movement, the king said - "Hey Shibikavahako! What is this that you do? Walk at the same speed. 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)