vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 13: भरत-चरित्र
»
श्लोक 58
श्लोक
2.13.58
विलोक्य नृपति: सोऽथ विषमां शिबिकागतिम्।
किमेतदित्याह समं गम्यतां शिबिकावहा:॥ ५८॥
अनुवाद
इस प्रकार शिबिका की विचित्र चाल देखकर राजा ने कहा - "हे शिबिकावाहको! यह क्या करते हो? उसी गति से चलो ॥58॥
Thus, seeing Shibika's odd movement, the king said - "Hey Shibikavahako! What is this that you do? Walk at the same speed. 58॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×