श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.13.52 
तं तादृशं महात्मानं भस्मच्छन्नमिवानलम्।
क्षत्ता सौवीरराजस्य विष्टियोग्यममन्यत॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
राजा के सेवकों ने भी राख में छिपी हुई अग्नि के समान उस महात्मा का रूप देखकर उसे बेगार के योग्य समझा ॥52॥
 
Even the king's servants, seeing the appearance of that great soul, who was like a fire hidden among ashes, considered him worthy of forced labour. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)