श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.13.51 
ततस्सौवीरराजस्य प्रयातस्य महात्मन:।
विष्टिकर्ताथ मन्येत विष्टियोग्योऽयमित्यपि॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर एक दिन महात्मा सौविरराज कहीं जा रहे थे। उस समय उनके बेगार करनेवालों ने सोचा कि वे भी बेगार के योग्य हैं॥ 51॥
 
Thereafter, one day Mahatma Sauvirraj was going somewhere. At that time his forced labourers thought that he too was worthy of forced labour.॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)