vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 13: भरत-चरित्र
»
श्लोक 51
श्लोक
2.13.51
ततस्सौवीरराजस्य प्रयातस्य महात्मन:।
विष्टिकर्ताथ मन्येत विष्टियोग्योऽयमित्यपि॥ ५१॥
अनुवाद
तदनन्तर एक दिन महात्मा सौविरराज कहीं जा रहे थे। उस समय उनके बेगार करनेवालों ने सोचा कि वे भी बेगार के योग्य हैं॥ 51॥
Thereafter, one day Mahatma Sauvirraj was going somewhere. At that time his forced labourers thought that he too was worthy of forced labour.॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×