vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 13: भरत-चरित्र
»
श्लोक 4
श्लोक
2.13.4
भरत: स महीपाल: शालग्रामेऽवसत्किल।
योगयुक्त: समाधाय वासुदेवे सदा मन:॥ ४॥
अनुवाद
ऐसा कहा जाता है कि राजा भरत सदैव भगवान वासुदेव में मन लगाकर शालग्राम क्षेत्र में निवास करते थे॥4॥
It is said that King Bharat always used to live in Shalagram area with his mind concentrated on Lord Vasudev. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×