श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.13.37 
सर्वविज्ञानसम्पन्न: सर्वशास्त्रार्थतत्त्ववित्।
अपश्यत्स च मैत्रेय आत्मानं प्रकृते: परम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! वे समस्त ज्ञान से युक्त थे, सम्पूर्ण शास्त्रों का सार जानते थे और प्रकृति से परे अपनी आत्मा को सदैव देखते थे॥37॥
 
O Maitreya! He was full of all knowledge and knew the essence of all the scriptures and always saw his soul beyond nature. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)