श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.13.34 
जातिस्मरत्वादुद्विग्न: संसारस्य द्विजोत्तम।
विहाय मातरं भूय: शालग्राममुपाययौ॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे द्विजश्रेष्ठ! अपने पूर्वजन्मों का स्मरण करके वह संसार से विरक्त हो गया और अपनी माता को छोड़कर पुनः शालिग्राम क्षेत्र में आकर रहने लगा।
 
O best of the two, remembering his previous births, he became detached from the world and leaving his mother, he again came and started living in the Shaligram area.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)