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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 13: भरत-चरित्र
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श्लोक 31
श्लोक
2.13.31
कालेन गच्छता सोऽथ कालं चक्रे महीपति:।
पितेव सास्रं पुत्रेण मृगपोतेन वीक्षित:॥ ३१॥
अनुवाद
तदनन्तर राजा भरत ने उस मृग बालक को अपने पुत्र के समान अश्रुपूर्ण नेत्रों से देखकर पिता के समान अपने प्राण त्याग दिए ॥31॥
Later, King Bharata, being looked at by the deer child with tearful eyes of his son, gave up his life like a father. ॥31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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