श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.13.30 
चपलं चपले तस्मिन्दूरगं दूरगामिनि।
मृगपोतेऽभवच्चित्तं स्थैर्यवत्तस्य भूपते:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उस राजा का स्थिर मन मृग के चंचल होने पर चंचल हो जाता था और मृग के हट जाने पर चला जाता था ॥30॥
 
The steady mind of that king became restless when the deer became restless, and went away when the deer moved away. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)