श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.13.26 
विषाणाग्रेण मद‍्बाहुं कण्डूयनपरो हि स:।
क्षेमेणाभ्यागतोऽरण्यादपि मां सुखयिष्यति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
क्या वह वन से सकुशल लौटकर अपने सींगों से मेरी भुजाओं को खुजाकर मुझे प्रसन्न करेगा?॥ 26॥
 
Will he return safely from the forest and make me happy by scratching my arms with his horns?॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)