श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.13.25 
एषा वसुमती तस्य खुराग्रक्षतकर्बुरा।
प्रीतये मम जातोऽसौ क्व ममैणकबालक:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
देखो, पृथ्वी उसके खुरों के चिह्नों से किस प्रकार रंगी हुई है। मैं सोच रहा हूँ कि मेरे सुख के लिए उत्पन्न हुआ वह मृग-शिशु आज कहाँ है॥ 25॥
 
See how the earth is painted with the marks of his hooves. I wonder where that fawn, born for my pleasure, is today.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)