श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.13.18 
हरिणीं तां विलोक्याथ विपन्नां नृपतापस:।
मृगपोतं समादाय निजमाश्रममागत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हिरणी को मरा हुआ देखकर तपस्वी भरत उसके बच्चे को अपने आश्रम में ले आये।
 
Seeing the deer dead, the ascetic Bharata brought her child to his ashram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)