श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 13: भरत-चरित्र  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.13.1 
श्रीमैत्रेय उवाच
भगवन‍्सम्यगाख्यातं यत्पृष्टोऽसि मया किल।
भूसमुद्रादिसरितां संस्थानं ग्रहसंस्थिति:॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेयजी बोले - हे प्रभु! मैंने आपसे पृथ्वी, समुद्र, नदी और ग्रहों की स्थिति के विषय में जो कुछ पूछा था, वह सब आपने बता दिया है॥1॥
 
Sri Maitreya said - O Lord! Whatever I had asked you about the position of the earth, the oceans, the rivers and the planets, you have described it all.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)