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श्लोक 2.12.9  |
अप्सु तस्मिन्नहोरात्रे पूर्वं विशति चन्द्रमा:।
ततो वीरुत्सु वसति प्रयात्यर्कं तत: क्रमात्॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| उस रात्रि में वह पहले जल में प्रवेश करता है, फिर वृक्षों और लताओं आदि में निवास करता है और तत्पश्चात् धीरे-धीरे सूर्य में चला जाता है॥9॥ |
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| That night he first enters the water, then resides in trees and creepers etc. and thereafter gradually goes into the sun.॥ 9॥ |
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