vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार
»
श्लोक 9
श्लोक
2.12.9
अप्सु तस्मिन्नहोरात्रे पूर्वं विशति चन्द्रमा:।
ततो वीरुत्सु वसति प्रयात्यर्कं तत: क्रमात्॥ ९॥
अनुवाद
उस रात्रि में वह पहले जल में प्रवेश करता है, फिर वृक्षों और लताओं आदि में निवास करता है और तत्पश्चात् धीरे-धीरे सूर्य में चला जाता है॥9॥
That night he first enters the water, then resides in trees and creepers etc. and thereafter gradually goes into the sun.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×