vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार
»
श्लोक 6
श्लोक
2.12.6
सम्भृतं चार्धमासेन तत्सोमस्थं सुधामृतम्।
पिबन्ति देवा मैत्रेय सुधाहारा यतोऽमरा:॥ ६॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! इस प्रकार देवतागण अर्धमासिक में एकत्रित चन्द्रमा के अमृत का पान करने लगते हैं, क्योंकि अमृत देवताओं का आहार है॥6॥
O Maitreya! In this way, the gods start drinking the nectar of the moon collected in half a month because nectar is the diet of the gods.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×