vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार
»
श्लोक 5
श्लोक
2.12.5
क्रमेण येन पीतोऽसौ देवैस्तेन निशाकरम्।
आप्याययत्यनुदिनं भास्करो वारितस्कर:॥ ५॥
अनुवाद
जिस क्रम से देवतागण चन्द्रमा का पान करते हैं, उसी क्रम से जलप्रिय सूर्यदेव शुक्ल प्रतिपदा से प्रतिदिन उन्हें बल प्रदान करते हैं॥5॥
In the same order in which the gods drink the moon, the water-loving Sun God strengthens them every day with Shukla Pratipada. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×