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श्लोक 2.12.43  |
तस्मान्न विज्ञानमृतेऽस्ति किञ्चित्-
क्वचित्कदाचिद्द्विजवस्तुजातम्।
विज्ञानमेकं निजकर्मभेद-
विभिन्नचित्तैर्बहुधाभ्युपेतम्॥ ४३॥ |
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| अनुवाद |
| अतः हे ब्राह्मण! ज्ञान के अतिरिक्त कहीं भी कोई भौतिक वस्तु नहीं है। एक ही ज्ञान को भिन्न-भिन्न मनों ने अपने-अपने कर्मों के भेद से भिन्न-भिन्न प्रकार से ग्रहण किया है।॥43॥ |
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| Therefore, O Brahmin! There is no material thing anywhere except knowledge. The same knowledge has been accepted in different ways by different minds due to the difference in their respective actions. ॥ 43॥ |
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