श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.12.40 
यदा तु शुद्धं निजरूपि सर्वं
कर्मक्षये ज्ञानमपास्तदोषम्।
तदा हि सङ्कल्पतरो: फलानि
भवन्ति नो वस्तुषु वस्तु भेदा:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जिस समय जीव आत्मज्ञान द्वारा समस्त दोषों से मुक्त हो जाता है और समस्त कर्मों का क्षय होकर अपने शुद्ध स्वरूप में स्थित हो जाता है, उस समय संकल्पवृक्ष के फलस्वरूप आत्मा में वस्तुओं के भेद का बोध नहीं होता ॥40॥
 
At the time when the living being becomes free from all faults through self-knowledge and gets established in its pure form due to the decay of all the karmas, at that time there is no realization of differences of things in the soul as a result of the resolution tree. 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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