vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार
»
श्लोक 37
श्लोक
2.12.37
यदम्बु वैष्णव: कायस्ततो विप्र वसुन्धरा।
पद्माकारा समुद्भूता पर्वताब्ध्यादिसंयुता॥ ३७॥
अनुवाद
हे विप्र! भगवान विष्णु के स्वरूप जल से पर्वतों और समुद्रों सहित कमलाकार पृथ्वी उत्पन्न हुई है॥37॥
Hey Vipra! From water, which is the embodiment of Lord Vishnu, the lotus-shaped earth along with mountains and oceans was born. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×