vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार
»
श्लोक 25
श्लोक
2.12.25
ग्रहर्क्षताराधिष्ण्यानि ध्रुवे बद्धान्यशेषत:।
भ्रमन्त्युचितचारेण मैत्रेयानिलरश्मिभि:॥ २५॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! समस्त ग्रह, तारे और नक्षत्र वायुरूपी रस्सी द्वारा ध्रुव से बंधे हुए, यथायोग्य परिक्रमा करते रहते हैं।
O Maitreya! All the planets, stars and constellations keep revolving in a proper manner, tied to the Pole by a rope of air. 25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×