श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 12: नवग्रहोंका वर्णन तथा लोकान्तरसम्बन्धी व्याख्यानका उपसंहार  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.12.13 
निस्सृतं तदमावास्यां गभस्तिभ्य: सुधामृतम्।
मासं तृप्तिमवाप्याग्रॺां पितर: सन्ति निर्वृता:।
सौम्या बर्हिषदश्चैव अग्निष्वात्ताश्च ते त्रिधा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अमावस्या के दिन चन्द्रमा की चाँदनी से निकले हुए सुधामृत को पीकर अत्यंत तृप्त होने वाले तीन प्रकार के पितर - सौम्य, बर्हिषद और अग्निश्वत्ता - एक महीने तक तृप्त रहते हैं ॥13॥
 
On the day of Amavasya, the three types of ancestors - Saumya, Barhishad and Agnishwatta, who are extremely satisfied after drinking the Sudhamrit emanating from the moonlight, remain satisfied for a month. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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